असम में मदरसों को नहीं मिलेगी सरकारी मदद। असम विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र सोमवार को शुरू हुआ। पहले दिन राज्य के शिक्षा वित्त और स्वास्थ्य आदि मामलों के मंत्री डॉ हेमंत विश्वा शर्मा ने सदन में इस बिल को पेश किया। जिसको लेकर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया। असम में सभी सरकारी स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। लेकिन अब इसके बाद मदरसों को सरकारी मदद नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने एक और कदम उठाया है। आज असम में मदरसों को नहीं मिलेगी सरकारी मदद को लेकर असम विधानसभा में इस संबंध के विधेयक पेश किया गया है।

असम में मदरसों को नहीं मिलेगी सरकारी मदद

शिक्षा मंत्री हेमंत विश्वा शर्मा ने कहा कि विधेयक के पास होने के बाद असम में सरकारी मदरसों का संचालन बंद हो जाएगा। उन्होंने सरकारी मदरसों के संचालन को लेकर कहा कि भविष्य में सरकार द्वारा कोई मदरसा स्थापित नहीं किया जाएगा।

हम शिक्षा प्रणाली के वास्तव में धर्मनिरपेक्ष पाठ्यक्रम लाने के लिए इस विधेयक को पेश करने को लेकर बहुत खुश है। उन्होंने कहा कि देश के हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन अन्य धर्मों के विधायकों को आज बधाई देना चाहिए, क्योंकि आज तक किसी ने अपने धर्म की शिक्षा को सरकारी फंड के जरिए मुहैया कराने की मांग नहीं उठाई है।https://www.fastkhabre.com/archives/2608

शर्मा ने कहा कि मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के जो भी शिक्षक हैं उन्हें बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। उनकी नौकरी पहले की तरह बहाल रहेगी। उन्होंने कहा कि इन दोनों तरह के विद्यालय को सामान्य विद्यालय के रूप में बदल दिया जाएगा।

असम में मदरसों को नहीं मिलेगी सरकारी मदद 260 करोड़ का बचत

शिक्षा मंत्री हेमंत विस्वा शर्मा ने अक्टूबर में कहा था कि असम में कुल 610 सरकारी मदद से चलते हैं, जिसमें सरकार हर साल 260 करोड रुपए खर्च करती है। उन्होंने कहा था कि राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड असम को भंग कर दिया जाएगा।

मंत्री ने यह भी कहा कि सभी सरकारी मदरसो को उच्च विद्यालयों में तब्दील कर दिया जाएगा और वर्तमान छात्रों के लिए नया नामांकन होगा। संस्कृत स्कूलों को कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाएगा।

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