मेलबर्न: न्यूजीलैंड में नवनिर्वाचित युवा सांसद में डॉक्टर गौरव शर्मा ने बुधवार को संसद में संस्कृत में शपथ ली। ऐसा कर उन्होंने न्यूजीलैंड में इतिहास रच दिया। वह भारत के बाहर संस्कृत में शपथ लेने वाले दूसरे नेता बन गए, जिसने संस्कृत में शपथ लेने वाले का पहला नाम सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोषी का है, जिसने जुलाई 2020 में संस्कृत में ही शपथ ग्रहण किया था

अब हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर गांव से ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर शर्मा ने न्यूजीलैंड के हैमिल्टन बेस्ट से लेकर पार्टी के सांसद चुने गए जिसने संस्कृत में ही शपथ लेकर इतिहास रच दिया। डॉ शर्मा महज 33 साल के सांसद बने। उससे पहले उन्होंने वर्ष 2017 में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें उस वक्त हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार उन्होंने नेशनल पार्टी मसिन्डो को पराजित किया है।

बता दे कि शर्मा ने ऑकलैंड से एमबीबीएस किया है। उसके बाद उन्होंने वाशिंगटन में रहकर एमबीए की डिग्री ली।उन्होंने अमेरिका, स्विजरलैंड, वियतनाम, नेपाल और भारत के लोक स्वास्थ्य एवं नीति निर्धारण के क्षेत्र में काम किया है। वह अभी हैमिल्टन के नॉटन में जनरल प्रैक्टिशनर के तौर पर काम करते हैं।

डॉ शर्मा ने 2 भाषा में ली शपथ

भारत के उच्चायुक्त मुकेश परदेसी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि डॉ शर्मा ने भारत और न्यूजीलैंड की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति गहरा प्यार और सम्मान दिखाते हुए उन्होंने 2 भाषा में शपथ लिया। उन्होंने पहले न्यूजीलैंड की भाषा माओरी में शपथ ग्रहण किया, उसके बाद भारत की भाषा संस्कृत में लिया शपथ लिया। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने संस्कृत में शपथ क्यों लिया, हिंदी में क्यों नहीं लिया तो उन्होंने जवाब दिया कि सबको खुश नहीं किया जा सकता। मुझे लगता है संस्कृत मे सभी भाषाओं का आदर होता है। इसलिए मैंने इस भाषा में शपथ ग्रहण को सही समझा। इससे सभी भाषाओं को सम्मान मिला है।

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