देश की अर्थव्यवस्था में कोविड़ के शुरुआती झटके के बाद सुधार दिखाई दे रहा है। लॉकडाउन के असर से वित्त वर्ष 2020 से की पहली तिमाही में तगड़े झटके के बाद दूसरी तिमाही के उबरने के संकेत दिए हैं। दूसरी तिमाही में जीडीपी में गिरावट -7 15 फ़ीसदी रही। जबकि पहली तिमाही में जीडीपी में -23.9 फ़ीसदी की गिरावट रही थी।

वित्त वर्ष की पहली यानी जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 24 फ़ीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है। अगर पहली तिमाही से तुलना करें तो अर्थव्यवस्था को रिकवरी मिली है। लेकिन इसके बावजूद नेगेटिव ग्रोथ इकोनामी के लिए सही संकेत नहीं है।

देश मंदी की ओर

ज्यादातर अर्थशास्त्रियों और रेटिंग एजेंसियों ने सितंबर तिमाही में जीडीपी 5 से 10 फ़ीसदी तक नेगेटिव रहने यानी इसमें गिरावट का अनुमान लगाया है। यानी तकनीकी रूप से भारत में मंदी आ जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक के इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक इतिहास में पहली बार भारत तकनीकी रूप से मंदी में प्रवेश कर चुका है। रिजर्व बैंक ने सितंबर तिमाही में जीडीपी में  8.6 फ़ीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया है।

आइए जानते हैं मंदी के बारे में

अर्थव्यवस्था में मान्य परिभाषा के मुताबिक अगर किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही नेगेटिव में रहती है।यानी ग्रोथ की वजह उसमे गिरावट आती है। तो इसे मंदी की हालत मान लिया जाता है। इस हिसाब से अगर दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वास्तव में नेगेटिव रही तो यह कहा जा सकता है कि देश में मंदी आ चुकी है।

 

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