भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की एक आवाज पर हजारों किसान कड़ाके की सर्दी में दिल्ली के बॉर्डर पर अपनी मांगों को लेकर इकट्ठा हो गए। जिसकी एक आंसू को देख एक बार फिर से किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा है। राकेश सभी किसानों की आवाज बनकर सामने आए हैं। जिनपर किसान सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं और उनकी उम्मीद है कि वो उनकी मांगों को सरकार से मनवा लेंगे।

राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन एक ऐसा संगठन है जिसकी पहचान पूरे देश में है और इसके अध्यक्ष राकेश टिकैट के बड़े भाई नरेश टिकैत हैं। लेकिन व्यवहारिक तौर पर यूनियन से जुड़े फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं। राकेश भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे बेटे हैं।

राकेश टिकैत अभी किसानों की ओर से कृषि संशोधन बिल पर लगातार सरकार से बात कर रहे हैं। अमित शाह से मुलाकात कर बातचीत करने वाले किसानो में भी राकेश टिकैत शामिल थे।

कौन है राकेश टिकैत

राकेश टिकैत एक ऐसे व्यवहारिक नेता है जो धरना प्रदर्शन के साथ-साथ किसानों के व्यवहारिक हित की बात करते है। राकेश टिकैत के पास इस वक्त भारतीय किसान यूनियन की कमान है। इनका जन्म मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में 4 जून 1969 में हुआ था। 1992 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल पद पर नौकरी करते थे। 1993-94 में दिल्ली के लाल किले पर स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में चल रहे किसानों के आंदोलन के चलते सरकार का आंदोलन खत्म कराने का जैसे ही दबाव पड़ने लगा उसी समय राकेश टिकैत ने अपनी नौकरी छोड़ दी।

राकेश का निजी जीवन

उन्होंने 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी से शादी की दो थी। उनके एक पुत्र चरण सिंह और दो पुत्री सीमा और ज्योति है। इनके तीनों बच्चों की शादी हो गई है। राकेश चार भाई हैं। जिसमें सबसे बड़े नरेश टिकैत जो भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वहीं दूसरे नंबर पर राकेश टिकैत है जो बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता है। तीसरे भाई सुरेंद्र टिकैत मेरठ के एक शुगर मिल में मैनेजर है और छोटा भाई नरेंद्र टिकैत खेतीबाड़ी करते हैं।

भारतीय किसान यूनियन की नींव

राकेश टिकैत

1987 में भारतीय किसान यूनियन की नींव रखी गई थी। जब बिजली के दामों को लेकर किसानों में शामली जनपद के करमुखेड़ी में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन किया गया था। जिसमें 2 किसान अकबर और जयपाल की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके बाद ही भारतीय किसान यूनियन बनाया गया। जिसका अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत को बनाया गया था।15 मई 2011 में महेंद्र सिंह टिकैत की मृत्यु हो गई उसके बाद इसकी कमान उसके बड़े बेटे नरेश टिकैत को सौंपी गई।

राकेश टिकैत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

  • उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय से m.a. की पढ़ाई पूरी की
  • अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने में सब लाने में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नौकरी की
  • 1993-94 में लाल किले पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के द्वारा नौकरी छोड़ भारतीय किसान यूनियन के सदस्य के रूप में शामिल हो गए।
  • पिता की मृत्यु के बाद दो भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता बन गए हैं
  • 2007 में उन्होंने पहली बार मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था
  • फिर उन्होंने 2014 में राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा
  • 2018 में हरिद्वार उत्तराखंड से दिल्ली तक किसान क्रांति यात्रा के नेता थे।
  • किसानों की लड़ाई लड़ते रहने के कारण राकेश टिकैट 44 बार जेल भी जा चुके हैं।
  • 2020 नवंबर में उनका संगठन भारतीय किसान यूनियन 2020 में शामिल हो गए।
  • जिसमें वह सरकार द्वारा बनाए गए नए कृषि कानून के विरोध किसान आंदोलन में शामिल हैं।

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