ऐसे 10 ट्रांजैक्शन करने पर घर आएगा Income Tax का नोटिस

नई दिल्ली: डिजिटल ट्रांजैक्शन (Digital Transaction) को बढ़ावा देने को इसके प्रति जागरूक करने के लिए मोदी सरकार ने बहुत सारे उपाय किए हैं।  इसके बावजूद भी कुछ लोग अपनी आदतों से मजबूर हैं, और हर छोटे-बड़े काम में कैश का इस्तेमाल करते हैं। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की छूट भी मिलती है। कैश प्रचलन को कम करने के लिए एटीएम से निकासी के नियम भी बड़े बदलाव किए गए हैं। इन सब के बावजूद भी अगर आप कैश (Cash Transaction) का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं उन कैश ट्रांजैक्शन के बारे में जिस पर इनकम टैक्स विभाग की नजर होती है। ऐसे 10 ट्रांजैक्शन करने पर घर आएगा Income Tax का नोटिस

ऐसे 10 ट्रांजैक्शन करने पर घर आएगा Income Tax का नोटिसइनकम टैक्स के नियम के तहत किसी भी सूरत में 2 लाख से ज्यादा का कैश ट्रांजैक्शन मंजूर नहीं किया गया है। आइए आज हम यहां आपको 10 ट्रांजैक्शन के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके नियमों मे अगर अनदेखी की तो टैक्स विभाग की नजर आप पर होगी, और जल्द आपको उसका नोटिस भी आ सकता है।

ऐसे 10 ट्रांजैक्शन करने पर घर आएगा Income Tax का नोटिस

अगर एक वित्त वर्ष में फिक्स्ड डिपॉजिट में 10 लाख से ज्यादा जमा किया जाता है तो इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग से शेयर की जाती है। इसमें कैश ट्रांजैक्शन के अलावा डिजिटल ट्रांजैक्शन और चेकबुक के माध्यम से ट्रांजैक्शन भी शामिल होते हैं। जिस बैंक के एफडी अकाउंट में इस लिमिट से ज्यादा डिपॉजिट होगा, उसे और जमा करने वाले को इनकम टैक्स विभाग से जल्द नोटिस आ सकता है।

इसके अलावा एक वित्त वर्ष में शेयर में 10 लाख से ज्यादा निवेश करने पर कंपनी इसकी जानकारी टैक्स विभाग को देती है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह का निवेश शामिल होता है। इसी तरह म्यूचुअल फंड में 10 लाख से ज्यादा निवेश करने पर भी इस ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया जा सकता है।

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अगर कोई इंडिविजुअल एक वित्त वर्ष में विदेशी टूर पर 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च करता है तो ऐसे मे भी इनकम टैक्स विभाग की नजर ऐसे ट्रांजैक्शन पर रहती है।

एक वित्त वर्ष में सेविंग अकाउंट्स से 10 लाख कैश निकासी की है या फिर जमा किया है तो बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को शेयर करता है। इसमें डिजिटल लेन-देन शामिल नहीं है। करंट अकाउंट के लिए  50 लाख रुपए कैश लिमिट है।

अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो कैश में जमा करने से बचे। एक वित्त वर्ष में अगर क्रेडिट कार्ड बिल के रूप में 1 लाख से ज्यादा कैश जमा किया तो इसकी जानकारी टैक्स विभाग को दी जाती है। अगर क्रेडिट कार्ड का बिल एक वित्त वर्ष में 10 लाख से ज्यादा होता है तो भी टैक्स विभाग नोटिस जारी कर सकता है। इसमें डिजिटल ट्रांजैक्शन के साथ कैश ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं।

रियल एस्टेट मे 30 लाख से ज्यादा निवेश पर

आप अगर रियल एस्टेट में 30 लाख से ज्यादा निवेश करते हैं तो रजिस्ट्रार इसकी जानकारी टैक्स विभाग को देता है। इसमें भी कैश और डिजिटल दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं।

अगर आप कोई सर्विस या प्रोडक्ट खरीदते हैं तो 2 लाख से ज्यादा कैश में लेनदेन नहीं किया जा सकता है। अगर 2 लाख से ज्यादा की ज्वैलरी खरीदी है तो जूलर्स को इसकी जानकारी टैक्स विभाग को देनी होगी। उसी तरह कार खरीदारी करने पर 2 लाख से ज्यादा कैश देने पर कार डीलर को इसकी सूचना टैक्स विभाग को देनी होती है।

एक वित्त वर्ष में 10 लाख का डिमांड ड्रॉफ्ट कैश में बनाया जाता है तो बैंक को पैन कार्ड की जानकारी शेयर करनी होगी क्योंकि इसे ट्रैक किया जाता है।

जब किसी इंडिविजुअल को लेकर टैक्स विभाग को ऐसी जानकारी मिलती है तो वह उस शख्स के रिटर्न की जांच करता है। अगर रिटर्न फाइलिंग और इन खर्च में असमानताएं पाई जाती हैं तो टैक्स विभाग उसपर नोटिस जारी करता है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार, निवेशक को अगर ज्यादा राशि म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में लगानी है, तो बेहतर होगा कि वह डिजिटल तरीके से निवेश करे। निवेशक भले ही नकदी के लेनदेन की जानकारी नहीं देता, लेकिन आयकर विभाग संबंधित संस्थान की बैलेंस शीट के जरिए बड़ी राशि के लेनदेन का पता लगा लेता है और संबंधित करदाता से स्पष्टीकरण की मांग कर सकता है।

 

By Azad

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