देश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब 5 भारतीय भाषाओं में भी होगी, गुरुवार को नई शिक्षा नीति National Education Policy 2020 के 1 साल हुए पूरे एक साल पूरा होने पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश के 8 राज्यों में 11 इंजीनियरिंग कॉलेज अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी, तमिल, तेलगू, मराठी और बंगाली में शुरू करने जा रहे हैं।

National Education Policy 2020 के 1 साल हुए पूरे

National Education Policy 2020 के 1 साल हुए पूरे

प्रधानमंत्री ने कहा शिक्षा के विषय में पूज्य बाबू महात्मा गांधी कहा करते थे कि राष्ट्रीय शिक्षा को सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय होने के लिए राष्ट्रीय परिस्थितियों को रिफ्लेक्ट करना चाहिए। बाबू के इसी दूरदर्शी विचार को पूरा करने के लिए स्थानीय भाषाओं में शिक्षा का विचार नई शिक्षा नीति में रखा गया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि बीते एक साल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार बनाकर बहुत से फैसले लिए गए। हमें यह याद रखना है कि नई शिक्षा नीति ही भविष्य के भारत का आधार तैयार करेगी और तमाम अन्य फैक्टर्स में से सबसे अहम कारण होगी। 21वीं सदी का आज का युवा अपनी व्यवस्था और अपनी दुनिया को अपने ही हिसाब से बनाना चाहता है। ऐसे में उसे एक्सपोजर चाहिए और पुराने बंधनों से मुक्ति चाहिए।

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हम देख सकते हैं कि छोटे कस्बों और गांवों से निकले युवा कैसे-कैसे कमाल कर रहे हैं। हम टोक्यों ओलंपिक में भी देख सकते हैं कि भारत के सुदूर इलाकों से निकले युवा भी देश का नाम रौशन कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर मशीन लर्निंग तक में युवा में अपना परचम लहराने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यही युवा भारत के स्टार्टअप सिस्टम में क्रांति ला रहे हैं। डिजिटिल इंडिया को नई गति दे रहे हैं। आप कल्पना कीजिए कि जब इस युवा पीढ़ी को अपने सपनों के अनुरूप वातावरण मिलेगा तो उनकी शक्ति कितनी ज्यादा बढ़ जाएगी।

National Education Policy 2020 के 1 साल हुए पूरे लिया अहम फैसला

इस नई शिक्षा नीति पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बताया, “अब उच्च शिक्षा में स्थानीय भाषा मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन का विकल्प हो गया है, 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज 5 भारतीय भाषाओं यानि इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इंजीनियरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में ट्रांस्लेशन के लिए टूल भी तैयार किया जा चुका है। क्षेत्रीय भाषा में अपनी पढ़ाई शुरू करने जा रहे छात्र छात्राओं को मैं विशेष बधाई देना चाहता हूं, इसका सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब वर्ग को, गांव और कस्बों में रहने वाले मध्यम वर्ग के छात्रों को होगा। इन्हीं परिवारों से आने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा लेंग्वेज डिवाईड का सामना करना पड़ता था, सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं परिवार के होनहार बच्चों को उठाना पड़ता था।”

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गरीब बच्चों का बढ़ेगा आत्मविश्वास

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “मातृ भाषा में पढ़ाई से गरीब बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनके सामर्थ्य और प्रतिभा के साथ न्याय होगा। प्रारंभिक शिक्षा में भी मातृ भाषा को प्रोत्साहित करने का काम शुरू हो चुका है। जो विद्या प्रवेश प्रोग्राम आज लॉन्च किया गया, उसकी भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। प्ले स्कूल का कॉन्सेप्ट अभी तक बड़े शहरों तक ही सीमित है वह विद्या प्रवेश के जरिए दूर दराज के स्कूलों तक जाएगा। यह कार्यक्रम आने वाले समय में युनिवर्सल प्रोग्राम के तौर पर लागू होगा और राज्य भी अपनी अपनी जरूरत के हिसाब से इसे लागू करेंगे, यानि देश के किसी भी हिस्से में बच्चा अमीर का हो या गरीब का, उसकी पढ़ाई खेलते और हसते हुए बड़ी आसानी से कर सकेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि अब देश में सांकेतिक भाषा को भी सब्जेक्ट का दर्जा दिया गया है, देश में 3 लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनको शिक्षा के लिए सांकेतिक भाषा की आवश्यकता पड़ती है, इसे समझते हुए भारतीय संकेतिक लेंग्वेज को एक सब्जेक्ट का दर्जा दिया गया है, अब छात्र इसे एक भाषा के तौर पर भी पढ़ पाएंगे। इससे इस भाषा को बढ़ावा मिलेगा और दिव्यांग छात्रों को भी सहायता मिलेगी।” पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे युवाओं को देश को समर्थ बनाने के लिए पूरी दुनिया के मुकाबले एक कदम आगे बढ़कर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि बीते एक साल में देश के 1,200 से ज्यादा उच्च शिक्षण संस्थानों ने स्किल इंडिया से जुड़े कोर्सों की शुरुआत की है।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का किया शुभारंभ

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का भी शुभारंभ किया जो उच्च शिक्षा में छात्रों के लिए कई प्रवेश और निकास का विकल्प प्रदान करेगा। इसके साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं में प्रथम वर्ष के इंजीनियरिंग कार्यक्रम और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए दिशा-निर्देश भी जारी करेंगे।

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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की जाने वाली पहलों में ग्रेड 1 के छात्रों के लिए तीन महीने का नाटक आधारित स्कूल तैयारी मॉड्यूल विद्या प्रवेश, माध्यमिक स्तर पर एक विषय के रूप में भारतीय सांकेतिक भाषा; एनआईएसएचटीएचए 2.0, एनसीआरटी द्वारा डिजाइन किया गया शिक्षक प्रशिक्षण का एक एकीकृत कार्यक्रम; सफल (सीखने के स्तर के विश्लेषण के लिए संरचित मूल्यांकन), सीबीएसई स्कूलों में ग्रेड 3, 5 और 8 के लिए एक योग्यता आधारित मूल्यांकन ढांचा और एक वेबसाइट जो पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समर्पित होगा, शामिल हैं।

 

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